Saturday, July 17, 2010

ब्लागिंग आपके लिए एक व्यसन है एक अय्याशी है। आप नेता न बन सके आप संसद में न जा सके तो आप ने एक आभासी संसद बना ली है।

महक जी ! आप अनवर जी के ब्लाग पर आये तो आपको चन्द सवर्णों से परिचय हो गया , अगर आप किसी दलित के ब्लाग पर गये होते तो आपके दिव्य दृष्टि क्षेत्र में आज कुछ दलित भी जरूर होते। आप कह सकते हैं कि मैं किसी ब्लाग पर दलित सवर्ण देखकर नहीं जाता। चलिए मान लिया लेकिन मुद्दा देखकर तो जाते हैं क्या आपको किसी दलित चिंतक की बात में दम ही नजर न आया।
आप के पास सब कुछ है । ब्लागिंग आपके लिए एक व्यसन है एक अय्याशी है। आप नेता न बन सके आप संसद में न जा सके तो आप ने एक आभासी संसद बना ली है। किसी वीडियो गेम की तरह खेलते रहिये इसे। क्षमा कीजिये मैं ठोस काम में यकीन करता हूं। कभी आपको निष्पक्ष और ठोस काम करते देखूंगा तो खुद आकर सम्मिलित हो जाउंगा। अभी तो यह मृग मरीचिका आपको और आपके जैसे पेट भरों को ही मुबारक हो। यह लेख मैं कल पोस्ट करता लेकिन नेट गड़बड़ा गया था। यह लेख आज भी प्रासंगिक है।

20 comments:

  1. ''इधर एक दिन की आमदनी का औसत है चवन्नी का
    उधर लाखों में गांधी जी के चेलों की कमाई है''

    ''कोई भी सिरफिरा धमका के जब चाहे जिना कर ले
    हमारा मुल्क इस माने में बुधुआ की लुगाई है''

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  2. महक जी ! आप अनवर जी के ब्लाग पर आये तो आपको चन्द सवर्णों से परिचय हो गया , अगर आप किसी दलित के ब्लाग पर गये होते तो आपके दिव्य दृष्टि क्षेत्र में आज कुछ दलित भी जरूर होते। आप कह सकते हैं कि मैं किसी ब्लाग पर दलित सवर्ण देखकर नहीं जाता। चलिए मान लिया लेकिन मुद्दा देखकर तो जाते हैं क्या आपको किसी दलित चिंतक की बात में दम ही नजर न आया।

    आप के पास सब कुछ है । ब्लागिंग आपके लिए एक व्यसन है एक अय्याशी है। आप नेता न बन सके आप संसद में न जा सके तो आप ने एक आभासी संसद बना ली है। किसी वीडियो गेम की तरह खेलते रहिये इसे। क्षमा कीजिये मैं ठोस काम में यकीन करता हूं। कभी आपको निष्पक्ष और ठोस काम करते देखूंगा तो खुद आकर सम्मिलित हो जाउंगा। अभी तो यह मृग मरीचिका आपको और आपके जैसे पेट भरों को ही मुबारक हो। यह लेख मैं कल पोस्ट करता लेकिन नेट गड़बड़ा गया था। यह लेख आज भी प्रासंगिक है।

    मैंने तो पहले ही कहा था कि सच को झेलना हरेक के बस की बात नहीं है और विशेषकर आप जैसे धंुधग्रस्त के लिए तो बिल्कुल भी नहीं। मुझे पता है कि हिंदू परंपराओं के रखवालों ने टीवी चैनल्स तक पर हमले किये हैं। बाबा साहब की ‘द रिडल्स आफ हिंदूइज्म‘ पर भी बैन लगवाया है। आज भी स्थिति बहुत अधिक बदली नहीं है http://hindugranth.blogspot.com/2010/07/blog-post_15.html

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  3. वाह सत्या गौतम जी, क्या आईना दिखाया है आपने, ये इन सवर्णो की सोची समझी चाल है, जब दलित जागृत हो गया तो ये लोग अब उनका भी सहारा ले रहे हैं जो कल तक इनको बुरा कह रहा था. इनकी तुच्छ मानसिकता अब सब के सामने है. मुसलमानो को तो अपनी संसद में सम्मिलित कर लिया, परंतु जब दलित का नाम आया तो लगे बगले झाकने.

    दलित वाणी
    मनोहर पासवान

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  4. आजतक पर आरएसएस के गुंडों का हमला
    कल शाम करीब पांच बजे आरएसएस के गुंड़ों ने आजतक चैनल के दिल्ली दफ्तर पर हमला किया और भारी तोड़-फोड़ मचायी। हजारों की संख्या में वीडियोकॉन टावर के भीतर जबरदस्ती घुस आए इन गुंड़ों ने ग्राउंड फ्लोर पर करीने से सजे गमले,मेटल डिटेक्टर डोर और कैफे कॉफी डे को बुरी तरह तहस-नहस कर दिया। चैनल की फुटेज देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये लोग कितनी तैयारी के साथ हमले की नीयत से यहां पहुंचे थे। लेकिन इस हमले को लेकर आरएसएस प्रवक्ता राम माधव ने साफ कहा कि कोई हमला नहीं हुआ है। आजतक के संवाददाता बार-बार वीडियो फुटेज का हवाला देते रहे कि ये सब कैमरे में कैद है लेकिन माधव ने बस इतना कहा कि उत्साह में आकर थोड़ा-बहुत कुछ कर दिया होगा,इसके लिए भी जिम्मेवार आप ही लोग(आजतक) हैं लेकिन लोगों का इरादा हमला करना बिल्कुल भी नहीं था। अब सवाल है कि वन्दे मातरम का नारा लगानेवाले आरएसएस और उसके प्रवक्ता यदि झूठ बोलते हैं तो फिर आगे क्या किया जाए?
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/07/blog-post_17.html?showComment=1279374852583#c8035633282365064955

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  5. सत्य गौतम जी आपकी सोच भी दलित के नाम पर ही सही लेकिन है पीड़ित की सहायता करने की भावना से ओत-प्रोत | हम आपके सम्बेदनाओं के साथ है लेकिन हम दलित ,सवर्ण ,जात ,पात में पड़कर इंसानियत की लड़ाई को कमजोड नहीं करना चाहते हैं | हमारा मानना है की इंसानियत की एक जात होती है जो आज पीड़ित है इसलिए हमसब को मिलकर इंसानियत की सहायता करनी चाहिए | इंसानियत के जात के आगे ये दलित सवर्ण सब बकबास है | आप हम लोगों के साथ भले ना हों लेकिन इस दलित शब्द से बाहर निकलिए और इंसानियत के शब्द को तरजीह दीजिये | आपसे आग्रह है की आप अपने प्रोफाइल को पूरा करें और अपना सही फोटो उसमे प्रदर्शित करें तो अच्छा रहेगा | आपके विचारों से तो थोडा बहुत अवगत हो गया हूँ ....

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  6. जो लोग टी.वी. चैनल्स वालों पर हमला कर सकते हैं वे बदमाश मुझे छोड़ देंगे क्या ?
    वे मेरे हाथ पैर तोड़ देंगे और मैं अपनी सगी मां , सारी भारत मां नहीं, की सेवा करने से भी वंचित कर दिया जाउंगा। सॉरी, आप मुझे बुजदिल भले कहें लेकिन मुझे उन्मादी हिंदुओं के हाथों मरना नहीं है और अभी तक तो मैं बाबा साहब की सबसे बड़ी इच्छा भी पूरी न कर पाया अर्थात अभी तक मैं धर्म परिवर्तन नहीं कर पाया हूं।

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  7. अबे सत्य गौतम हम तुझे अच्छी तरह पहचान गए है अब तू अपनी खैर मना

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  8. विचारणीय

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  9. @स्वयंभू सत्य उर्फ़ गौतम जी

    लगता है की आप मेरा आपके द्वारा पिछली पोस्ट पर दिया गया ज़हरीला कमेन्ट डिलीट करने से चिढ गए हैं लेकिन मैंने आपको पहले ही स्पष्ट तौर पर बता दिया था की आपका या किसी का भी इस ब्लॉग पर जातिवाद और मज़हब आदि का ज़हर घोलने के प्रयास को बिलकुल सफल नहीं होने दिया जाएगा .

    अब ज़रा आपके इन कमेंट्स का क्रमपूर्वक जवाब देना चाहूँगा

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  10. This comment has been removed by the author.

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  11. अब ज़रा आपके इन कमेंट्स का क्रमपूर्वक जवाब देना चाहूँगा

    महक जी ! आप अनवर जी के ब्लाग पर आये तो आपको चन्द सवर्णों से परिचय हो गया , अगर आप किसी दलित के ब्लाग पर गये होते तो आपके दिव्य दृष्टि क्षेत्र में आज कुछ दलित भी जरूर होते। आप कह सकते हैं कि मैं किसी ब्लाग पर दलित सवर्ण देखकर नहीं जाता। चलिए मान लिया लेकिन मुद्दा देखकर तो जाते हैं क्या आपको किसी दलित चिंतक की बात में दम ही नजर न आया।

    अरे मेरे भाई !! मैं आपको कैसे समझाऊं की मेरे लिए इस बात का कोई महत्व नहीं है की सही बात और मुद्दा उठाने वाला दलित है या सवर्ण , मुझे जहाँ भी सही मुद्दा दिखा मैं गया , मैं आपकी तरह जाने से पहले ब्लॉगर की जाती या धर्म नहीं देखता हूँ , आप मुझे उन लोगों का ब्लॉग adress send करें जिनकी बात आप कर रहें हैं ,मैं अभी उनके ब्लॉग पर जाने को तैयार हूँ , मेरे लिए कोई भी चिन्तक सिर्फ चिन्तक है सवर्ण चिन्तक या दलित चिन्तक नहीं , मुझे अभी उनके ब्लॉग के link send करें , मैं वहां पर जाऊँगा भी और जिनका भी मकसद नेक लगेगा उन्हें इस ब्लॉग से जुड़ने के लिए आमंत्रित भी करूँगा ,

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  12. आप के पास सब कुछ है । ब्लागिंग आपके लिए एक व्यसन है एक अय्याशी है। आप नेता न बन सके आप संसद में न जा सके तो आप ने एक आभासी संसद बना ली है। किसी वीडियो गेम की तरह खेलते रहिये इसे।

    आपके इन कमेंट्स ने मुझे बहुत दुःख पहुंचाया है क्योंकि आपने ब्लॉग्गिंग की तुलना व्यसन, अय्याशी और विडियो गेम से कर दी , जबकि मैं इसे एक मंच मानता हूँ अपनी बात बिना किसी जाती,मजहब, प्रान्त,या देश की सीमाओं में बंधें पूरी दुनिया तक पहुचाने का और उनकी बातें, समस्याएं आदि जानने का, मेरे और हम सभी ब्लोग्गेर्स के लिए ब्लॉग्गिंग अयाशी या व्यसन नहीं बल्कि एक पूजनीय मंच है ,
    आपने खुद कहा है की मेरे पास सब कुछ है फिर आपने एक बार भी यह क्यों ना सोचा की जिसके पास सब कुछ है उसे यहाँ पर किस चीज़ का लालच होगा ,उसे क्या मिलेगा किसी भी प्रकार का भेद-भाव करके ,और गौतम भाई सब कुछ तो नहीं लेकिन उस इश्वेर की कृपा से इतना कुछ ज़रूर है की एक 10 -15 हज़ार की नौकरी मिल जाए और आराम से अपनी ज़िन्दगी गुजार सकूं , मुझे बताइये मुझे जरूरत क्या है ये सब करने की ,अगर आपकी बातों को ही लें की मेरे लिए ये एक time pass है तो मेरे दोस्त इस दुनिया में टाइम पास के तो ऐसे-2 माध्यम हैं की तुम्हारे जैसा कोई व्यक्ति शायद ही इस ब्लॉग जगत में झाँकने की भी इच्छा करे लेकिन मेरी ऐसी thinking ही नहीं है की इस दुनिया में पैदा हुए ,मौज-मस्ती की और फिर विदा हो गए , मेरा मकसद है कुछ बड़ा काम करना जो की मुझे इतनी शान्ति दे दे की इस दुनिया में मैं सिर्फ खुद के लिए और मेरे परिवार के लिए नहीं जिया बल्कि दूसरों के लिए भी ऐसा कुछ किया है जिसने उनकी ज़िन्दगी हमेशा के लिए बदल दी है ,लेकिन अभी मैं इस काबिल नहीं बना हूँ की इतने बड़े स्तर का कुछ कर सकूँ पर फिर भी जितना भी अभी कर सकता हूँ फिर चाहे वो कितना ही छोटा क्यों ना हो मैं करता हूँ ,
    जहाँ तक बात है नेता ना बन पाने की और असली संसद में ना जा पाने की तो दोस्त अभी तुम जानते ही क्या हो की मेरे भविष्य के प्लान्स क्या हैं ,जिस दिन जान जाओगे ये बात नहीं कहोगे ,
    मैं आपकी तरह सिर्फ समस्या पर रोने-धोने और एक वर्ग के खिलाफ आग उगलकर उस आग को बढाने का काम करने की बजाये समस्या के जड़ में जाकर उसका हल निकालना चाहता हूँ, इस मकसद से ही इस आभासी संसद का गठन किया गया है क्योंकि समस्याओं की सिर्फ आलोचना करने से बेहतर है उनका हल निकाला जाए

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  13. यदि ऐसा नहीं है तो किसी दलित के लिए कुछ करके दिखाइये।

    मुझसे ऐसी उम्मीद भूलकर भी मत कीजियेगा की मैं किसी दलित या सवर्ण के लिए कुछ करूँगा , मैं हर उस ज़रूरतमंद के लिए काम करूँगा जो की अभावों में है और जिसे मदद की ज़रुरत है बिना ये देखे की ये दलित है या ब्रह्मण, हिन्दू है या मुस्लिम अरे जब आपकी खुद की जाती की एक महिला मुख्यमंत्री के पद पर बैठी है और उसके राज में ही दलितों की पिटाई की जाती है दबंगों के द्वारा तो आप तो कुछ कहने के लायक ही नहीं रह जाते मित्र , क्या हुआ एक दलित को कुर्सी पे बिठाके ?,क्या मिटा दी उसने दलितों की दरिद्रता ?,उनके अभाव ?, बहन जी को चंदा इकठ्ठा करने और नोटों की माला पहनने से फुर्सत मिले तब जाकर के कुछ करें ना दलितों के लिए , दलित हितेषी बन्ने का दिखावा तो वो और आप कर ही रहे हैं लेकिन जैसे ही सत्ता और शक्ति आप जैसे लोगों के हाथों में आती है तो आप लोग भूल जातें हैं की ये सत्ता और शक्ति आपको उनका भला करने के लिए दी गयी है जिनसे आपने वादा करके vote लिए हैं ना की अपना बक्सा भरने के लिए ,आपमें और बहन जी में ज्यादा फर्क नहीं है

    ये दलित या ब्राहमण मुख्यमंत्री होने से कुछ नहीं होता दोस्त , एक इमानदार मुख्यमंत्री होना चाहिए फिर चाहे वो दलित हो, सवर्ण हो ,हिन्दू हो या मुस्लिम हो , उसका व्यक्तित्व महत्वपूर्ण है ना की उसकी जाती या धर्म

    आपसे प्रार्थना है की कृपया करके अपनी ये संकीर्ण सोच और मानसिकता बदल लें क्योंकि आपकी इन हरकतों से ये " ब्राह्मण बनाम दलित " या फिर ये " सवर्ण बनाम दलित " की खाई गहरी ही होगी कम नहीं , इसे गहरा करने की बजाये कम करने की कोशिश करें ,अपनी जो भी शिकायतें और समस्याएं हैं उन्हें शालीनतापूर्वक बिना भड़काऊ और ज़हरीले शब्दों का प्रयोग करे प्रस्तुत करें और फिर अपनी आँखों से देखें की यहाँ पर ऐसा कुछ नहीं है जो आपने अपने दिमाग में पाल रखा है

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  14. @honesty project democracy उर्ज जय कुमार झा जी

    आप अपनी शक्ति ऐसे लोगों पर व्यर्थ ना करें , ऐसे लोग अभी तक तो मुझ पर ही आरोप लगा रहे हैं फिर ये आपके पीछे भी पड़ जायेंगे , आप सबने खुद देखा की इस ब्लॉग की सबसे पहली पोस्ट पर इन भाई साहब के द्वारा इतना कुछ कहने के बावजूद भी मैंने इन्हें प्रेमपूर्वक समझाने की कोशिश कि कि हमारे इस ब्लॉग पर ऐसा कुछ नहीं है जैसा आपने सोच रखा है और साथ ही मैंने इन्हें सभी कि तरह बिना कोई भेद-भाव किये इस ब्लॉग का member बनने के लिए आमंत्रित भी किया लेकिन ये जनाब जानते हैं कि member बनने का मतलब होगा हर मुद्दे पर अपनी राय तर्क के साथ रखना जो इनके पास है नहीं , आप खुद देख लीजियेगा मेरे द्वारा इन्हें फिर से समझाने के बावजूद इनके मन से ये जातिवाद का ज़हर निकल जाए तो ,ये फिर इसी प्रकार के कमेंट्स करेंगे इसलिए इनका सिर्फ एक ही मकसद है कि जातिवाद का ज़हर किसी तरह से ब्लॉग जगत (जो कि अभी तक इससे अछूता है ) में भी घोला जाए और इस ब्लॉग पर आकर और ज़हरीले और भड़काऊ कमेंट्स करकर अपनी प्रसद्धि बढाई जाए

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  15. चिन्तन जिसका निम्न हो,उसका निम्न नशीब ।
    दुनिया का समझो उसे, सबसे बडा ग़रीब ॥

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  16. महक जी,

    कुंए के मेढक को कुंए में ही रहने दी जीये. समुद्र देखेगा तो पागल हो जायेगा. उत्तर प्रदेश कि मुखिया कि हालत तो देख ही रहें हैं आप लोग. गरीबो का गेंहू सड, गया, सफ़ेद ढूध काला हो गया है. पुरे उत्तर प्रदेश में श्रीमान आंबेडकर जी कि मूर्तियाँ दलितों को चिढ़ा - चिढ़ा के कह रही हैं , कि देखो ये क्या कर दिया तुम लोगो नो, तुम्हारे हिस्से कि रोटी भी अब पार्क और पार्क में बेजान खड़ी मूर्तियाँ खा रही है.

    दलित कहते किसे हैं. जरा कोई ये बताएगा. और स्वर्ण किसे कहते हैं ये भी बताइए.

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  17. महक जी आप सत्य गौतम की बात नही समझे इसका कहना है कि आपने दलितो लेखको और उनके ब्लाग को ढूँढा ही नही आप भी जनपक्ष आदि ब्लाग पर जाकर उन्हे देखे और दलित विरोधी मानसिकता का धब्बा अपने ऊपर से हटाएँ

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  18. @गिरी जी

    आपसे बिलकुल सहमत हूँ ,ये जनाब सच में समुद्र ही देखना चाहते हैं लेकिन हम भी इनके शुभचिंतक हैं इन्हें पागल नहीं होने देंगे

    महक

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  20. @Anonymous जी

    आपको इन भाई साहब से सहानुभूति प्रतीत होती है (मुझे भी थी लेकिन इनके भड़काऊ और मनगढ़ंत आरोप लगाने के रवैये ने रहने ना दी ) लेकिन एक बात आपको भी समझनी चाहिए की इन भाई साहब की बातों का समर्थन करने से आप अनजाने में ही सही लेकिन जातिवाद को बढ़ावा दे रहे हैं जो की भारत की एकता और अखंडता के लिए सही नहीं है

    अभी तक तो मेरा ब्लॉग देखने का तरीका ये है की किसी सज्जन की टिपण्णी पसंद आना ,फिर उसका ब्लॉग प्रोफाइल देखना और फिर उसका ब्लॉग देखना और ब्लॉग सही लगने पर उसे follow करना ,मैं खुद भी काफी समय से एक ऐसी वेबसाइट चाहता हूँ जहाँ पर मुझे सभी लेखकों के ब्लॉग उपलब्ध हो सकें , ये जो जनोक्ति नामक साईट आप बता रहें हैं कृपया उसका link भी send कर दें तो बहुत कृपा होगी

    जहाँ तक बात है दलित-विरोधी मानसिकता का धब्बा हटाने की तो जब मेरी इस प्रकार की मानसिकता है ही नहीं तो उसे हटाने का सवाल ही कहाँ से पैदा होता है ?
    ये तो वही बात हो गयी की एक बन्दा दूसरे से कह रहा है की मेरा हाथ छोड़ दो जबकि दूसरे ने उसका हाथ पकड़ा ही नहीं हुआ है तो वो छोड़ेगा कैसे ?

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