Friday, July 16, 2010

हिन्दूइज्मः धर्म या कलंक -एल. आर. बाली

हिन्दू निश्चित तौर पर उदार व सहनशील नहीं है।
हिन्दू से ज्यादा संकीर्ण व्यक्ति दुनिया में कहीं नहीं है।

- जवाहर लाल नेहरू
मुखपृष्ठ , हिन्दूइज्मः धर्म या कलंक
यह अंश एल. आर. बाली,संपादक-भीम पत्रिका, की पुस्तक ‘हिन्दूइज़्म : धर्म या कलंक‘ से साभार उद्धृत है। मिलने का पता : ईएस-393 ए, आबादपुरा, जालंधर 144003

18 comments:

  1. अबे ये क्या तफरी है

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  2. अबे ये क्या तफरी है

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  3. अबे ये क्या तफरी है

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  4. अबे ये क्या तफरी है

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  5. अबे ये क्या तफरी है

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  6. अबे ये क्या तफरी है

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  7. अबे ये क्या तफरी है

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  8. अबे ये क्या तफरी है

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  9. अबे ये क्या तफरी है

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  10. अबे ये क्या तफरी है

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  11. नेहरु जी कभी इतनी घटिया बात नहीं कर सकते, यार क्यों इतना उल्टा-सीदा लिखते हो? क्या दुश्मनी है तुम्हारी? नफरत फैलाना अच्छी बात नहीं है.

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  12. अबे तफरीहबाज लगता है तेरी समझ मे कुछ नही आया

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  13. sachchi bat he vishvas n hoto aao dekho mera blog

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  14. sachchi bat he vishvas n ho to mera blod dekh sakte ho

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