Showing posts with label क्षत्रिय. Show all posts
Showing posts with label क्षत्रिय. Show all posts

Wednesday, July 21, 2010

चिपलूनकर जी! आप खुद अपने तन की सबसे अद्भुत अंग पर हाथ रखकर कसम खाकर कह दीजिये कि आपने कभी कोई ब्लॉग मेरे प्रोफ़ाइल जैसा नहीं बनाया ?, अनवर जमाल जी वाह।

क्या कभी नदी के दो किनारे कभी मिल सकते हैं ?
क्या कभी रात दिन मिल सकते हैं ?
क्या उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव भी कभी मिल सकते हैं ?
क्या कभी सुरेश चिपलूनकर और अनवर जमाल एकराय हो सकते हैं ?हां नदी के दो किनारे मिल सकते हैं अगर उसपर पुल बन जाये ।
हां रात और दिन मिल सकते हैं अगर सांझ हो जाये।
उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव भी मिल सकते हैं अगर ....
इस अगर के बाद का जवाब आपके लिये छोड़ दिया ताकि आपके पंखों और उनकी उड़ान की क्षमता भी मैं चेक करता रह सकूं और समय आने पर उन्हें कतर सकूं।
राष्ट्रवादी चिपलूनकर और सुधारवादी अनवर जमाल भी एकमत हो सकते हैं अगर मुसीबत उनके चेले पर पड़ जाये । वह दोनों को गुरूतुल्य कहता है।
अब यह पता नहीं कि उनका गुरू है कौन ?
जिनके तुल्य इन दोनों को उनके साझा शिष्य महक जी मानते हैं ।दोनों ने उन्हें समझाया परंतु उनकी समझ में तो तब आये जब वे समझना चाहें।जब उन्हें अपने गुरूओं के दिशा निर्देश को मानना ही नहीं है तो काहे को दिखावे के लिये उन्हें गुरूतुल्य कहकर उनके हाथ में इज्जत की लॉलीपॉप थमाते हैं जी ?
अनवर जमाल जी मेरे विचार भांप रहे हैं और समय उपयुक्त पाकर उनका अंतिम संस्कार करेंगे, वाह।हम इंतिजार करेंगे उस समय का, बिल्कुल पक्का।खुद वेद और रामायण में कमियां बताएं तो रिसर्च और सच कहलाये और वही काम हम कहलायें तो वे हमपर गुर्रायें, ठीक भी है, पठान रूलिंग क्लास में ही तो आता है, क्षत्रिय ही तो ठहरा। क्षत्रिय अपने बराबर किसी दलित को कैसे मानेगा वह तो दलित का अंगूठा या फिर गर्दन ही मांगेगा।
चिपलूनकर जी! आपने कहा कि मेरा प्रोफ़ाइल ठीक नहीं है।अगर मुझे अपने पैरों पर दो रोटी कमाने के लिये बचे रहना है तो मेरा प्रोफ़ाइल ऐसे ही ठीक है। आप खुद अपने तन की सबसे अद्भुत अंग पर हाथ रखकर कसम खाकर कह दीजिये कि आपने कभी कोई ब्लॉग मेरे प्रोफ़ाइल जैसा नहीं बनाया ?
क्या आपने उससे कभी टिप्पणी नहीं की या उसपर टिप्पणी नहीं पाई ?
अगर आप झूठ बोलेंगे तो आपके उस अंग पर खतरा मंडराने लगेगा जैसे कि आजकल सवर्णों की रोजी रोटी पर आरक्षण के कारण मंडरा रहा है और परेशान सुज्ञ फिर रहा है प्रस्ताव लाता हुआ ।