Tuesday, October 26, 2010

क्या यही है हिन्दू देवताओं का दिव्य देवत्व ?

समर्पण
डा. अम्बेडकर के इस संसार से विदा होने पर मेरे सार्वजनिक जीवन का आरम्भ हुआ। चालीस वर्ष पूर्व, जब ,
मैंने 6 दिसम्बर,1956 को सरकारी नौकरी त्याग कर अम्बेडकर-मिशन के प्रचार व प्रसार का बीड़ा उठाया तो यह गुमान भी न था कि मार्ग इतना कठिन है, ऐसा ख़तरनाक और दुखदायक है।
इन वर्षों में वह कौन सी आफ़त है जो मुझ पर नहीं टूटी। हवालात व जेल के दुख झेले, सरकारी और ग़ैर सरकारी मुक़द्दमों की परेशानियां सहन कीं। कभी अपनों का परायापन, कभी साथियों का विश्वासघात, तो कभी साधनहीनता के थपेड़े। यही सदा महसूस हुआ कि सुख-चैन मिलने का नहीं।
कुछ ही वर्षों में वह दौर बीत गया, फिर एक नया दौर शुरू हुआ, कर्तव्य पालन के इश्क ने संघर्ष से मुहब्बत पैदा की, विपरीत हालात ने दृढ़ता को जन्म दिया,दृढ़ता ने साहस को और फिर साहस ने सुख और दुख के बीच के सभी भेद मिटा डाले -
दुनिया मेरी बला जाने महंगी है या सस्ती है
मौत मिले तो मुफ़्त न लूं हस्ती की क्या हस्ती है
फ़ानी बदायंूनी
इस अवस्था तक पहुंचने में जिस ने मेरा हाथ स्नेहपूर्ण मजबूती से निरन्तर थामे रखा जिन्होंने बंगलूर(कर्नाटक राज्य)
में भीमराव अम्बेडकर की याद को चिरस्थायी बनाने और साधनहीन विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने हेतु मैडिकल, डेंटल और इंजिनियरिंग कालेजों, स्कूलों, अनेकों होस्टलों की स्थापना की, अपने उसी
गुरूभाई श्री एल. शिवालिंगईया साहिब
को यह रचना सादर समर्पित है।
- पृ. सं. 3 , हिन्दुइज्म , धर्म या कलंक ? लेखक मुद्रक व प्रकाशक ; एल. आर. बाली , संपादक भीम पत्रिका, ईएस 393 ए आबादपुरा , जालंधर 144003

अध्याय दो
नायक नहीं, खलनायक
विष्णु और कुत्ते में कोई अंतर नहीं
स्वसंवेद उपनिषद् में इस प्रकार कहा गया है-
संस्कृत में मूलसूत्र
पुनर्भवनं नो इहास्ति ... आगमपुराणेतिहासन्धर्मशास्त्रेषु! यत्तानि तु मुगध-तरमुनिशब्दवाच्यैः जीवबुद्धवुदैरचितानि भवन्ति कालकर्मात्मकमिंद स्वभावत्मक चेति न सुकृत नो दुष्कृतम्। पुष्पितवचनेन मोहितास्रे भवन्ति। केचिद् क्यं देवानुग्रहवतुः यत्र विरंचि विष्णुरूद्रा ईश्वरश्च गच्छन्ति तत्रैव ‘वानो गदर्भाः मार्जाराः कृमयश्च।
-संस्कृति संस्थान, ख्वाजा कुतुब (वेद नगर) बरेली द्वारा प्रकाशित
श्री एम.एन. राय ने अंग्रेज़ी में इसका अनुवाद इस प्रकार किया है-
"There is no incarnation, no God , no heaven , no hell , all traditional religious literature is the work of conceited fools , Nature , The organiser , and time the destoyer , are the rules of things and take no account of virtue and vice , in awarding happiness or misery to men people deluded by flowery speeches cling God's temples and priests when in reality , there is n
हिन्दी अनुवाद
न कोई अवतार होता है, न परमात्मा है और न ही स्वर्ग या नर्क है। धर्मग्रन्थ अभिमानी-मूर्खों द्वारा रचे गए हैं। स्वभाव और काल सब वस्तुओं के शासक हैं। वे मनुष्यों को सुख या दुख प्रदान करने के लिए पापों या पुण्यों पर विचार नहीं करते। लफ़्फ़ाज़ी से मोहित लोग ही देव मंदिरों और पण्डे-पुरोहितों के पीछे जाते हैं क्योंकि असल में विष्णु और कुत्ते में कोई अन्तर नहीं है।
»»»»»»
हिन्दू पुरोहिताई के विरूद्ध विद्रोह करने और उसकी खिल्ली उड़ाने वाला कोई मार्टन लूथर नहीं पैदा कर सके। न वे कोई सच्चा क्रान्तिकारी ही पैदा कर सकेह हैं। ऐसा क्यों ? इस प्रश्न का उत्तर प्रो. डिके ने निम्नलिखित ‘ाब्दों में दिया है-
‘‘कभी-कभी लोग यह सवाल पूछते हैं कि पोप यह अथवा वह सुधार क्यों नहीं करता ? इस प्रश्न का उत्तर यह है कि जो पुरूष क्रान्तिकारी होता है वह पोप नहीं बनता और जो पोप बन जाता है उसमें क्रान्तिकारी बनने की कोई इच्छा नहीं होती।‘‘
श्री कृष्ण ने गीता में कहा है-
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरोजनः।
सा यत्प्रमाणं कुरूते लोकस्तदनुवत्र्तते ।। 3-21 ।।
अर्थातः एक श्रेष्ठ व्यक्ति जो कुछ करता है उसी को दूसरे लोग भी करते हैं और जिस आदर्श को वह खड़ा करता है उसी का अनुसरण जनता करती है। तात्पर्य यह कि बड़ों के आचरण छोटों के लिए अनुकरणीय उदाहरण बन जाते हैं।
क्या हिंदुओं को आगामी पृष्ठों में दिए अपने श्रेष्ठ व्यक्तियों यानि उनके धर्म-नायकों का अनुकरण करना चाहिए ? क्या उनका आचरण अनुकरण योग्य है ? विचारिए कि यह महापुरूष गौरव का कारण हैं अथवा लज्जा का ? यदि लज्जा का तो इनका त्याग क्यों नहीं करते ?
हिन्दू धर्मशास्त्र रचयिता और उनके नायक कितने दुराचारी थे, इस सम्बंध में कुछ लिखने की बजाए विभिन्न हिन्दू ग्रन्थों के उदाहरण देना ज़्यादा ठीक समझता है। निम्नलिखित उदाहरणों से पाठकों को उनके चरित्र व व्यवहार का भलीभांति ज्ञान हो जाएगा-
1. अहल्या से संगम करने वाला इन्द्र
गोस्वामी तुलसीदास जी ने इन्द्र के बारे में लिखा है कि - ‘काक समान पाप रीतौ छली मलीन कतहूं न प्रतीतो‘ अर्थात इन्द्र का तौर तरीका काले कौए का सा है, वह छली है। उसका हृदय मलीन है तथा किसी पर वह विश्वास नहीं करता। वह अश्वमेध के घोड़ों को चुराया करता था। इन्द्र ने गौतम की धर्मपत्नी अहल्या का सतीत्व अपहरण किया था। कहानी इस प्रकार है-
शचीपति इन्द्र ने आश्रम से इन्द्र की अनुपस्थिति जानकर और मुनि का वेष धारण कर अहल्या से कहा ।। 17 ।। हे अति सुन्दरी! कामीजन भोगविलास के लिए ऋतुकाल की प्रतीक्षा नहीं करते, अर्थात इस बात का इन्तज़ार नहीं करते कि जब स्त्री मासिक धर्म से निवृत हो जाए तभी उनके साथ समागम करना चाहिए। अतः हे सुन्दर कमर वाली! मैं तुम्हारे साथ प्रसंग करना चाहता हूं ।। 18 ।। विश्वामित्र कहते हैं कि हे रामचन्द्र! वह मूर्खा मुनिवेशधारी इन्द्र को पहचान कर भी इस विचार से कि देखूं देवराज के साथ रति करने में कैसा दिव्य आनन्द प्राप्त होता है, इस पाप कर्म के करने में सहमत हो गई ।। 19 ।। तदनंतर वह वह कृतार्थ हृदय से देवताओं में श्रेष्ठ इन्द्र से बोली कि हे सुरोत्तम! मैं कृतार्थ हृदय से अर्थात दिव्य-रति का आनन्दोपभोग करने से मुझे अपनी तपस्या का फल मिल गया। अब, हे प्रेमी! आप यहां से शीघ्र चले जाइये ।। 20 ।। हे सुन्दर नितम्बों वाली! मैं पूर्ण सन्तुष्ट हूं। अब जहां से आया हूं, वहां चला जाऊँगा। इस प्रकार अहल्या के साथ संगम कर वह कुटिया से निकल गया।
2. वृन्दा का सतीत्व लूटने वाला विष्णु
विष्णु ने अपनी करतूतों का सर्वश्रेष्ठ नमूना उस समय दिखलाया जब वे असुरेन्द्र जालन्धर की स्त्री वृन्दा का सतीत्व अपहरण करने में तनिक भी नहीं हिचके। उसको वरदान था जब तक उसकी स्त्री का सतीत्व अक्षुण बना रहेगा, तब तक उसे कोई भी मार नहीं सकेगा। पर वह इतना अत्याचारी निकला कि उसके लिए विष्णु को परस्त्रीगमन जैसे घृणित उपाय का आश्रय लेना पड़ा।
रूद्र संहिता युद्ध खंड, अध्याय 24 में लिखा है -
विष्णुर्जलन्धरं गत्वा दैत्यस्य पुटभेदनम् ।
अर्थात : विष्णु ने जलन्धर दैत्य की राजधानी जाकर उसकी स्त्री वृन्दा सतीव्रत्य (पतिव्रत्य) नष्ट करने का विचार किया।
इधर शिव जलन्धर कि साथ युद्ध कर रहा था और उधर विष्णु महाराज ने जलन्धर का वेष धारण कर उसकी स्त्री का सतीत्व नष्ट कर दिया, जिससे वह दैत्य मारा गया। जब वृन्दा को विष्णु का यह छल मालूम हुआ तो उसने विष्णु से कहा-
धिक् तदेवं हरे शीलं परदाराभिगामिनः।
ज्ञातोऽसि त्वं मयासम्यङ्मायी प्रत्यक्ष तपसः।।
अर्थात् : हे विष्णु ! पराई स्त्री के साथ व्यभिचार करने वाले, तुम्हारे ऐसे आचरण पर धिक्कार है। अब तुम को मैं भलीभांति जान गई। तुम देखने में तो महासाधु जान पड़ते हो, पर हो तुम मायावी, अर्थात महाछली।

3. मोहिनी के पीछे दौड़ने वाला कामी- शिव शंकर
भगवान (?) शंकर ने दौड़कर क्रीड़ा करती हुई मोहिनी को ज़बरदस्ती पकड़ लिया। इसके बाद क्या हुआ ? महादेव शिव शंकर की तत्कालीन दयनीय अवस्था का चित्र देखना हो तो श्रीमद्भागवत, स्कन्द 8, अध्याय 12, देखने का कष्ट करें जिसमें लिखा है-
आत्मानं मोचयित्वाङग सुरर्षभभजान्तरात्।
प्रादवत्सापृथु श्रोणी माया देवविनिम्र्मता ।। 30 ।।
तस्यासौ पदवीं रूद्रो विष्णोरद्भुत कम्मर्णः।
प्रत्यपदत्तकामेन वैदिणेव निनिर्जितः ।। 31 ।।
तस्यानुधावती रेतश्चल्कन्दार्माघरेतसः।
शुष्मिणो यूथपस्येव वासितामनु धावतः ।। 32 ।।
अर्थात् : हे महाराजा ! तदन्तर देवों में श्रेष्ठ शंकर के दोनों बाहुओं के बीच से अपने को छुड़ाकर वह नारायणनिर्मिता विपुक्ष नितंबिनी माया (मोहिनी) भाग चली।। 30 ।। अपने वैरी कामदेव से मानो परास्त होकर महादेव जी भी विचित्र चरित्र वाले विष्णु का मायामय मोहिनी रूप के पीछे-पीछे दौड़ने लगे ।। 31 ।। पीछा करते-करते ऋतुमती हथिनी के अनुगामी हाथी की तरह अमोघवीर्य महादेव का वीर्य स्खलित होने लगा ।। 32 ।।
4. अपनी बेटी से बलात्कार करने वाला, जगत रचयिता : ब्रह्मा
‘ब्रह्मा‘ शब्द के विविध अर्थ देते हुए श्री आप्टे के संस्कृत-अंग्रेजी कोष में यह लिखा है -
"Mythologically Brahma is represented as being born in a lotus ' which spran from navel of Vishnu and as a creating the world by an illicit connection with his own daughter saraswati . Brahma had originally five heads , but one of them was cut down by Shiva with his ringfinger or burnt down by the fire from the third eye ."
अर्थात् : पुराणानुसार ब्रह्मा की उत्पत्ति विष्णु की नाभि से निकले कमल से हुई बतलाई गई है। उन्होंने अपनी ही पु़त्री सरस्वती के साथ अनुचित संभोग कर इस जगत की रचना की। पहले ब्रह्मा के पांच सिर थे, किन्तु शिव ने उनमें से एक को अपनी अनामिका से काट डाला व अपनी तीसरी आंख से निकली हुई ज्वाला से जला दिया।
श्रीमद्भागवत, तृतीय स्कन्ध, अध्याय 12 में लिखा है-
वाचं दुहितरं तन्वीं स्वयभूर्हरतीं मनः।
अकामां चकमे क्षत्रः सकाम इति नः श्रुतम्।। 28 ।।
तमधर्मे कृतमति विलोक्य पितरं सुताः।
मरीचि मुख्या मुनयो विश्रंभत प्रत्यबोधयन्।। 29 ।।
अर्थात् : मैत्रेय कहते हैं कि हे क्षता (विदुर) ! हम लोगों ने सुना है कि ब्रह्मा ने अपनी कामरहित मनोहर कन्या सरस्वती की कामना कामोन्मत होकर की ।। 28 ।। पिता की अधर्म बुद्धि को देखकर मरीच्यादि मुनियों ने उन्हें नियमपूर्वक समझाया।। 29 ।।
यह पतन की चरम सीमा नहीं ? इस से भी ज्यादा लज्जाजनक क्या कुछ और हो सकता है ?

5. गर्भवती ममता से भोग करने वाला गुरू : बृहस्पति
‘गुरू‘ शब्द का अर्थ है ‘गृणति धर्ममुपदिशतीति गुरू‘ (गृ ग कु, धे) अर्थात जो धर्म का उपदेश देता है वह गुरू है।
बृहस्पति इन्द्र आदि देवताओं का गुरू माना जाता है। इन्हीं की रची हुई एक स्मृति भी है जो बृहस्पति स्मृति के नाम से प्रसिद्ध है। ये अपने बड़े भाई उतथ्य की गर्भवती स्त्री ममता के लाख मना करने पर कामोन्मत्त होकर उस पर चढ़ बैठा।
श्रीमद्भागवत, स्कन्ध 1, अध्याय 20, में इस संबंध में इस प्रकार लिखा है-
तस्यैव वितथे वंशे तदर्थ यजतः सुतम्।
मरूतसोमेन मरूतो भरद्वाजमुपाददुः ।। 35 ।।
आन्तर्वल्र्या भ्रातृपत्न्यां मैथुनाय बृहस्पतिः।
प्रवृत्तो वारिंतो गर्भ शप्त्वा वीर्यमवासृजत्।। 36 ।।
तंप्रयुक्ताकामां ममतां भर्तृत्याग बिर्शकिताम्।
नाम निर्वचनंतस्य ‘लोकमेन सुराजगुः ।। 37 ।।
मूढ़े भारद्वाजमिमं भरद्वाजं बृहस्पते।
यादौ यदुक्त्वा पितरौ भारद्वाजस्ततत्वमम्।। 38 ।।
चोद्यमाना सुरैरेवं मत्वाधित्रथमात्मजम् ।
व्यासृजत्मरूतो विभ्रन्दत्तोऽप वितथेऽन्यये ।। 39 ।।
अर्थात् : स्ववंश ने इस प्रकार नष्ट हो जाने पर राजा भरत ने मरूतसोम नामक यज्ञ का अनुष्ठान किया। उस यज्ञ में मरूत् देवों ने राजा को भारद्वाज नामक पुत्र दिया ।। 35 ।। एक समय बृहस्पति कामातुर होकर अपने भाई की गर्भवती स्त्री के साथ मना किये जाने पर भी, मैथुन करने में प्रवृत्त हुए और गर्भ को शाप देकर अपना वीर्य छोड़ दिया ।। 36 ।। - पृ. सं. 154 से लेकर 160 पर्यन्त
अधिक प्रमाण के लिए यह भी देखा जा सकता है और फिर पूछिए अपने आप से कि क्या यही है हिन्दू देवताओं का दिव्य देवत्व ?
http://truereligiondebate.wordpress.com/2008/03/07/hindu-god-brahma-and-his-goddess-daughter-sarasvati-where-is-the-line-drawn-between-a-god-who-has-forced-sex-with-his-own-daughter-his-own-flesh-and-blood-and-runs-lusting-for-his-own-daughter-and/

52 comments:

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  5. तू झूठा है

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  7. तू झूठा है

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  8. मैं कल गुरू राजवीर से इसका उत्‍तर दिलवाउंगा

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  9. तथ्यपरक पोस्ट

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  10. मित्र आपने हिन्दू धर्म की धार्मिक पुस्तकों में १२०० साल के अन्धकार के दौरान होने वाले घुसपैट को नक़ल करके यहं लिखा है. इसको मुल्सिमो और इसाइओ ने लिखा है. और आपने अपने अंधे चश्मे से इनका प्रचार करने का बीड़ा उठाया है. यदि पगैम्बर के बारे में यासा ही लिखने का सहस किया तो सर काटने का फ़तवा भी जारी हो सकता है. यदि में अआप की माता जी या बेहें जी के बारे में कुछ इसी प्रकार से लिख दू तो इसका मतलब वो सच ही हो यासा जरुरी नहीं है. मित्र लिखने से पहेल स्त्यापान कर लो अन्यथा लेने के देने पड़ जायेंगे और ब्लोगिंग करना भूल जाओगे.

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  11. कुछ पड़ना ही है तो वेद पड़ो
    महान संत कैसे गौतम बुध,विवेकनद जैसे संतो की किताबे पदों
    तभी हिन्दू या सनातन धर्म को जान पायेगे

    क्योकि पुराण तो कथा के माध्यम से लोगो को समझाने का प्रयास है
    आप ने शायद बेम्हा विष्णु महेश को परमात्मा मान लिया है
    जब परमात्मा एक है तो तीन की बात कैसी

    यदि आप हिन्दू है तो वेद पड़ना शुरू करे वो दयानद जी के
    यदि मुस्लिम है और आप का मकसद केवल हिन्दुओ को बदनाम करना है
    मेरी तरफ से best of luck
    क्योकि येसा करने से आप का अल्लाह एक खास जगह देगा

    हिन्दू धर्म के हिसाब से मनसा वाचा कर्मना तीनो तरफ से पाप होता है

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  12. महोदय आपने बहुत ही अच्छी बात लिखी है और मैं आपका समर्थन करता हु,,मैं भी एक दलित ही हु....और ये जो लोग(बेवकूफ) आपके बातो को गलत कहते है वो अज्ञानी है....

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    1. मुल्लों की गुलामी ने तुम्हे पागल बना दिया है, दलीत नाम का मोहर लगाले अपने माथे पर शर्म नहीं आती तुम्हे ऐसी बात करने व ऐसी बात के समर्थन में... तुम्हारे बुजर्गो पर तुम कलंक हो... तुम्हारे बुजुर्गों का इतिहास पढ़ों उन्होने मुल्लों की यातनाऐं सही मैला ठोया लेकिन वो अपने धर्म नहीं बदले... उन्होने अपना कर्म बदला लेकिन धर्म नहीं...


      झूठ को सब झूठ ही बोला जाता है... ये ब्लाॅग लिखने वाले हरामखोर ने सब गलत लिखा है...

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    2. तुम लोगों को अब हम सभी जानते हैं कि तुम लोग कितने नीचे गिर सकते हो अब तुम्हारे बहकावे में कोई नहीं आयेगा अब लोग सनातन धर्म के लिए जागरूक है। पढ़े लिखे हैं। झूठ सच का पता है।

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  13. Anonymous said...
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    क्यों सत्य गौतम जी कहे हटा दिए कमेन्ट क्या किसी हिन्दू भाई ने आपको कुछ भला बुरा कहा था जो आपको अच्छा नहीं लगा या हम सब पाठको को नहीं पढने देना चाहते थे दम है तो मत हटाओ किसी भी तरह की टिप्पड़ी को तब हम जाने की आप सत्य गौतम हो नाम सत्य और बातें सब झूठ की
    एक हिन्दू

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  14. ठीक है मई मान लेता हूँ की जो तुमने लिखा वो सत्य है, पर यह कम ज़ोर हो गया है क्योंकि , तुमने अपने ब्लॉग पर किये गए कमेन्ट हटा दिए है| वैसे इतनी अच्छी विचार धरा वाले पुरुष क्या आप अपने पिता के चरण स्पर्श करते है, या फिर उनसे भी यह नाराज़गी है की शादी के बाद उन्होंने तुम्हारी माँ के साथ सम्भोग किया था |

    अगर कुछ समझ आया हो तोह इस प्रकार की ब्लॉग्गिंग छोड़ दो कुछ अच्छा लिखो जो आज के युग में लोगों को ज्ञान की ओर अग्ग्रसर करे भक्ति भाव आये.

    मैं किसी धर्म के खिलाफ नहीं हूँ पर किसी भी धर्म के लिए ऐसी बात सुनना भी पसंद नहीं करता |

    अगर दम है तोह यह कमेन्ट मूत हटाना |

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  15. यदि हिन्दू धर्म का पतन हुआ या हो रहा है तो तुम्हारे जैसे गद्दार लोंगो से, उन्हें भगवान मत मानो, पर वे हमारे पूर्वज है. तुम तो यार अपने बाप को भी गाली देते होगे की उसने तुम्हारी माँ के साथ सम्भोग क्यों किया. हिम्मत है तो इस्लाम के बारे में लिख कर दिखाओ. आज मुसलमानों की एकता का ही परिणाम है की हिन्दू तो दूर मुसलमान भी इस्लाम की कुरीतियों या बुराईयों के बारे में हिम्मत नहीं जूता पाता. शर्म नहीं आती तुम्हे पैदा होने पर.

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  16. यह किसी हिन्दु का ब्ळॉग नही कीडानवी का ब्ळॉग है

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  17. सत्य गौतम, क्या हुआ अपने पिताजी की माँ को चोदे की नहीं, अरे भाई वह तुम्हारी माँ को चोदा है और तुमने छोड़ दिया, रंडी की औलाद हिन्दुओ में ही बुरे दिखती है तुम्हे. हिम्मत है तो कुरान के बारे में लिखो तुम्हारी माँ छोड़ देंगे साले माधरचोद

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  18. madharchod osama bin laden ki aulad.. ja kar apni amma se pooch ki kis mulle se apni gand marwayi thi ki tere jaise gandbachche ko paida kiya..

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  19. wah....kya likha hai....satyawachan.

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  20. dukh ki baat ye hai ki hinduon ki koi bhi baat likhon,wo baatein unhiko pata nahi hoti...........unhone ved,manusmriti,ramayan,mahabharat,puran...kuch bhi padha nahi hota aur aa jaate hai Hindu dharm ki vakaalat karne....aur sach batao to inke muh se gaaliyaan nikalti hai...aur Kuraan k baaren me bura likhne ko kehte hai.....lekin inmese ek ki bhi ye aukaat nahi hai ki khud ke granth padhe aur logon ko jawab de...kaise denge......inke granth is laayak hai hi nahi ki ye log use defend kar sake....INKE GRANTHO ME STRIYON KA SABSE JADA APMAAN HOTA HAI.....inki ye bhi aukaat nahi ki jo granth inki hi maa nehenon ko gaaliyaan dete hai,ye unki buraaiyan maan le....inhe pyaara hai tp bas apna dharm..chahe wo gutter hi kyu na ho......

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  21. तुम ईश्वर के लिए ऐसी बात लिखते हो
    निश्चित ही तुम एक गन्दी नाली के कीड़े हो

    स्त्री जिसने तुम्हे पैदा किया है निश्चित ही तुम्हे पैदा करके मार डालना चाहिए था
    रहा जाती का तो बता दूँ कि
    "भगवान ब्रह्मा के मुख से तो ब्राह्मिन,
    भुजा से क्षत्रिय,
    उरु[जंघा ] से वैश्य,
    पैर से सूद्र उत्पन्न हुए ."
    यही बात मनुस्मृति में कही हुई है और ऐसा ही वर्णन भागवत पुराण में भी है|


    वर्ण का अर्थ हि "स्वभाव" होता है | वर्णाश्रम व्यवस्था में वेद का प्रमाण
    ब्राह्मणोंsस्य मुखमासिद बाहू राजन्य: कृत:|
    उरु तदस्य यद् वैश्य: पदाभ्याम शुद्रोसsजायत || यजुर्वेद (३१/१७)
    इस मंत्र में आल्कारिक रूप में मनुष्य समाज में चारो वर्णों के कर्तव्यो का निरूपण किया है | समाज में ब्राहमण मुख अथवा शिर्स्थानिया है, क्षत्रिय बाहू समान है ,वैश्य झांगो के समान और शुद्र पैरो के तुल्य है |
    "ब्रह्म हि ब्राह्मण:"- ब्रह्म पद इश्वर और वेद दोनों का वाचक है| जो वेद और इश्वर का ज्ञाता है, विद्या, सत्यभाषण, अदि गुणों से युक्त है तथा श्रेष्ट कर्मो में प्रवृत है वह ब्राह्मण है | जो बल, पराक्रम, आदि गुणों से युक्त होकर शरीर में भुजाओ के समान समाज की रक्षा करता है वह क्षत्रिय (क्षतात त्रायते ) कहता है | बल पराक्रम हि उसकी भुजाए है | अपने क्षत्रियोचित कर्त्तव्य का पालन करने से हि वह "राजन्य:" अर्थात यशस्वी ( राज्रू दीप्तौ ) होता है | इसी कारन वह "मित्र " ( सबका सुखदाता ) और "वरुण" (श्रेष्ठ) कहता है | उसे पराक्रम करने से हि आनंद आता है | इसी प्रकार जो खेती ,व्यापार आदि के लिए जांघो के समान भाग-दौड़ में समर्थ होने से सर्वत्र प्रवेश करता आता जाता है,उसे वैश्य कहते है | जो बौधिक स्थर पर हिन् होने पर भी शारीरिक श्रम से सबकी सेवा करता है,वह शुद्र कहता है |
    ब्राह्मण ,क्षत्रिय,वैश्य और शुद्र यह चार भेद जन्मा पर आधारित न होकर गुण-कर्म-स्वभाव पर आधारित है यह सिद्दांत सर्व शास्त्र सम्मत एवं तर्क प्रतिष्टित है |


    तुम पापी हो, मूर्ख हो और निश्चित ही हिन्दू नहीं हो !!!
    क्यूंकि हिन्दू किसी भी मजहब के ईश्वर की बुराई नहीं करता !!!
    तुम नरक में जाने को प्रयत्नशील हो !!!

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  22. दलित तो ब्राह्मण के पैरों में पड़ने लायक है

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  23. dalit wo hai jo bure kaam karta hai
    aur brahman wo hai jo sadgud hai

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  24. dalit wo hai jo bure kaam karta hai
    aur brahman wo hai jo sadgud hai

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  25. इन जुते चोरों को मन्दिरमें घुसना मना था ठिक ही था । सालों को पढने से भी दूर रखा था । पूरखों को मालुम था ये पर पे मैला उठाने वाले की औकात क्या है ।

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  26. चुतिया आंबेडकर का नाम क्यों बदनाम करता है । उन के प्रताप से साले ब्लोग लिखने के काबिल बना है । वरना पडा होता गू चाटता हुआ किसी गटरमें ।

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  27. Sahi hay bhai ye saaly Chamtkar kou namshkar hi jaanty hay pishab ghar may mandir bana leyty hay hai ladka manglik tou kutiya say shaadi kara dety hay. Gai kou maata kahty hay aur Chiken matan bady shouk say kha jaaty hay Phir juway may patniya haar jaaty hay beda gark kar rakha hay panditou nay inn ka

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  28. ये सत्य गौतम जैसे लोग अपने माँ के साथ भी सोने मे संकोच नहीं करने |
    डॉ. अम्बेडकर ने 1935 में ऐलान किया,"यद्यपि मैं मादर चोद नहीं महा मादर चोद हूँ और मैं अपनी माँ को चोदता इस से पहले ही भोशरी वाली मर गयी". उसने धर्मांतरण करते समय कहा था "आज से हम सब महा मादर चोद हुये".सत्य गौतम को कोइ प्रमाण चाहिए क्या डॉ. अम्बेडकर के मादर चोद होने का ......................... सब साले रंडी की औलाद है |
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  29. इतनी सारी झुटी बाते लिखने में तुझे थोडी भी शरम नहि आयी.आंबेडकर के बारेमे लिखुंगा तो हिल जाओगे...

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  30. हा बे चुतिए देखलिया तेरा चुतियापे वाला ग्यान।आखिर चुतियापे पर हि खतम हुआ।


    तू हिंदू हो ही नही सकता। aur teri research se pata chalta hai ke tune kya kiya......

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  31. हद हो गयी यार चूतियेपन की !! तुम जाहिलों को अपनी ग्रंथों का abcd नहीं पता और दूसरों पर ऊँगली उठा रहे हो ? बात चल रही थी तुम्हारे धर्म की, लिखने वाला हिन्दू और कमेंट करने वाले भी हिन्दू फ़िर बीच में इस्लाम और कुरान कहाँ से आ गया ? अपना नंगापन छुपाने के लिए दूसरों की आड़ क्यूँ ले रहे हो ? ये नंगापन तो तुम लोगों को विरासत में मिली है न फिर इससे शर्माना कैसा ? अंधों की तरह हजारों वर्षों से अंधभक्ति करते आ रहे हो फिर आज किसी ने तुम्हें आइना दिखा दिया तो सच्चाई हज़म नहीं हो रही ?

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    1. आरे ओ हबीब क्या हिंदु आपस मे बाते नहीं कर सकते.. तुम लोग भाई भाई बोलते हो और वहा गाजापट्टी में एक दुसरो की जान ले रहे हैं यह नही दिखता क्या.. और यह सब चल रहा था रमजान के पवित्र महिने में.. और हा ISIS ने वहा औरतो (१४ से ४८ तक उमर) के खतना कराने का फतवा जारी किया है उस के बारे में सोचो.. इस्लाम की सिख वहा जाके सुना.. यहा नही

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  32. मादरचोद की औलाद

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  33. tujhya aaicha bhok aaighalya

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  34. और आप जो भी हो.. दावे के साथ कह सकता हूं आंबेडकर जी भी हिंदू धर्म को मानते थे उनकी लढाई धर्म के कुरीतियों से थी.. और फिर आप भी धर्म छोडकर.. सुखी कतई नहीं है.. आपके घर में अशांति भरी पड़ी होगी..

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  35. srimadbhagwad puran me 19 adhyay hi hain, to yeh श्रीमद्भागवत, स्कन्ध 1, अध्याय 20, में इस संबंध में इस प्रकार लिखा है- adhyay kya bloger ne likh diya hai

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  36. kamine harami tumhari aukat sale gande nali ke ki kide ki hai dum hai toh mil kabhi fir bata dunga tujhe aur yaha jitne bhi sooar tera sath de rahe hai unko toh hum pehle hi niche gira chuke hai mere dharm ke brahman ke bare me agar kuch kkahA toh teri aa gayi warning smjh apne liye saale tere aukat kide ki hai aaj bhi tum log hamare pairo ki chappal ho aur rahoge hamesha hmne salo insan smjha tumko to tum hamsehi gaddari kar rahe ho saalo tum achhut ho gande ho humko agar tumhara sparsh bhi hua toh hame ultiya aa jati hai, aur ye sooar toh inko toh ham pacchadte aaye hai aur pacchadenge unki haar hi unki kismat hai wo unki kismat par rote the rote hai aur rote hi rehenge au tu gautam bhul se bhi kahi milna mat varna gataar me tere gande walo ke sath tujhe dubo dunga....
    shivaji ka vanshaj...
    ek maratha patil..
    jay maharashtra.
    balasaheb thakre ka matadhish

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  37. mere dharm ke bare me agar galti se bhi kuch maine dobara padha toh kasam chhatrapathi shivaji maharaj ki jaisa maharaj ne kiya tha haal sooaroka usase bhai bura karunga haal tera aaur tere gghar ke sabhi maa behno ka jo tune likha hai waisahi tujhse karwaunga tere hi gharwalo ke saath har chauraho pe..

    jay hind...
    bola shri chhatrapati shivaji mahaaraaj ki jay..
    mi je boltto mi fkt tech krto aala ka lakshyat oye salel kutrya

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  38. mere dharm ke bare me agar galti se bhi kuch maine dobara padha toh kasam chhatrapathi shivaji maharaj ki jaisa maharaj ne kiya tha haal sooaroka usase bhai bura karunga haal tera aaur tere gghar ke sabhi maa behno ka jo tune likha hai waisahi tujhse karwaunga tere hi gharwalo ke saath har chauraho pe..

    jay hind...
    bola shri chhatrapati shivaji mahaaraaj ki jay..
    mi je boltto mi fkt tech krto aala ka lakshyat oye salel kutrya

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  39. TNEN YOU SHOULD SAY ABOUT BUDDH HE IS JUST LIKE 900 CHOOHE KHAKAR BILLI HUJ KO CHALI , WHAT YOU SAY MAN..?

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  40. तेरी माँ का किसने बलात्कार किया था, जिस वर्णसंकर से हरामजादे तू फैदा हुआ..... ???

    हरामजादे तेरी आँखों में सूअर का बाल है, तुझे शर्म नहीं आ रही ऐसा ब्लाॅग लिग कर गद्हे की औलाद कुत्ते के बीज....

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  41. तेरी माँ का किसने बलात्कार किया था, जिस वर्णसंकर से हरामजादे तू फैदा हुआ..... ???

    हरामजादे तेरी आँखों में सूअर का बाल है, तुझे शर्म नहीं आ रही ऐसा ब्लाॅग लिग कर गद्हे की औलाद कुत्ते के बीज....

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  42. तेरी माँ का किसने बलात्कार किया था, जिस वर्णसंकर से हरामजादे तू फैदा हुआ..... ???

    हरामजादे तेरी आँखों में सूअर का बाल है, तुझे शर्म नहीं आ रही ऐसा ब्लाॅग लिग कर गद्हे की औलाद कुत्ते के बीज....

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  43. Satya gautam randi ki aulad
    hai Bap ka pata nhi hai koi bhaduva
    hoga Bechra apni ma ko chod chuka hai ambedkar ke Naam pe Kuch din ye mental hospital ja kutte se gand marwayega

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  44. is desh main brahmin chod ke sabhi dalit,ashpursha hain.salo khud ko bahut mahan ya pavitra mat samjo.

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  45. dalit log garib hote hain,asahay hote hain isliye ye sale log unpar anyay karte hain...agar gand main dam hain to musalmanose aise karke dekho kat ke rakh denge tumko...garibope atyachar karke konsi mardangi dikhate ho salo....

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  46. Bhai aap logo se nivedan h ki apes me met lado yr ky ho ga aap un ko gali do ge ya vo aap ko kuch mile ga aap logo ko to bato dekho bhi bolne vale bahot kuch bolte h, log to apne mata pita ko bhi gali de dete h...

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